कलेक्टरेट परिसर में हर्बल गुलाल के स्टॉल आकर्षण का केंद्र, स्व-सहायता समूहों की अच्छी बिक्री*

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*कलेक्टरेट परिसर में हर्बल गुलाल के स्टॉल आकर्षण का केंद्र, स्व-सहायता समूहों की अच्छी बिक्री*

*बेमेतरा 27 फरवरी 2026:-* होली पर्व के अवसर पर कलेक्टरेट परिसर में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल गुलाल के स्टॉल लगाए गए, जहां प्राकृतिक रंगों से तैयार उत्पादों की बिक्री की गई। स्टॉल पर अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों ने पहुंचकर हर्बल गुलाल की खरीदारी की और समूह की महिलाओं का उत्साहवर्धन किया।

                              इस दौरान जय मां सिद्धि स्व सहायता समूह, दही (विकासखंड साजा) द्वारा कुल 3,600 रुपये के हर्बल गुलाल का विक्रय किया गया। वहीं नर्मदा स्व सहायता समूह, झालम (विकासखंड बेमेतरा) ने 3,000 रुपये की बिक्री कर सराहनीय प्रदर्शन किया। समूह की महिलाओं ने बताया कि यह गुलाल प्राकृतिक एवं सुरक्षित सामग्री से तैयार किया गया है, जो त्वचा के लिए हानिकारक नहीं है तथा पर्यावरण के अनुकूल है। कलेक्टरेट परिसर में लगे इन स्टॉलों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। रंग-बिरंगे पैकेटों में सजे हर्बल गुलाल को लोगों ने विशेष रुचि के साथ खरीदा। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ प्रेमलता पदमाकर एवं एसडीएम भारद्वाज ने भी स्टॉल का अवलोकन कर हर्बल गुलाल खरीदा और महिला समूहों के प्रयासों की सराहना की। अधिकारियों ने उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया, गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं विपणन व्यवस्था की जानकारी लेते हुए महिलाओं को निरंतर नवाचार और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

                                उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों की यह पहल महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हर्बल उत्पादों को बढ़ावा देने से जहां स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। समूह की महिलाओं ने बताया कि त्योहारी अवसरों पर इस प्रकार की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। जिला प्रशासन द्वारा स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, विपणन प्लेटफॉर्म और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचा सकें। होली के अवसर पर नागरिकों से अपील की गई कि वे रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक एवं हर्बल गुलाल का उपयोग कर सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होली मनाएं।

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