बाजारपारा में जमीन का खेल या प्रशासनिक चुप्पी? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, अवैध प्रॉपर्टी कारोबार पर उठे सवाल…

बेमेतरा – शहर के बाजारपारा क्षेत्र में डायवर्टेड भूमि की रजिस्ट्री और कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मामले की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी अब तक न तो कोई ठोस जांच शुरू हुई है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई सामने आई है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और पत्रकारों द्वारा उठाए गए सवालों के अनुसार, जिस भूमि के संबंध में टुकड़ों में विक्रय नहीं किए जाने की शर्त होने की बात कही जा रही है, उसी भूमि की नकल जारी होने और रजिस्ट्री होने का मामला सामने आया है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो गया है कि संबंधित दस्तावेज किस आधार पर तैयार किए गए और पूरी प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर सत्यापन किया गया।
मामले में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि संबंधित हल्का क्षेत्र में भूमि संबंधी कई विवाद और शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। बावजूद इसके, शिकायतों और दस्तावेजों की ओर ध्यान नहीं दिया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायतों के बाद भी क्यों नहीं हुई जांच?
जानकारी के अनुसार, मामले से संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों की जानकारी पत्रकारों द्वारा एसडीएम एवं तहसीलदार स्तर तक पहुंचाई गई। इसके बावजूद यदि जांच शुरू नहीं होती है तो यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह है, जिसके कारण मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा?
लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, और यदि अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच से पहले ही चुप्पी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है।
अवैध प्रॉपर्टी कारोबार पर कब लगेगा अंकुश?
बेमेतरा में लगातार बढ़ते भूमि सौदों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नियमों को दरकिनार कर कुछ लोग अवैध तरीके से प्रॉपर्टी कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं? यदि डायवर्टेड भूमि, प्रतिबंधित शर्तों वाली जमीन या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री हो रही है, तो यह केवल एक मामले तक सीमित नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्न है।
जनता पूछ रही है…
प्रतिबंधित शर्तों वाली भूमि की नकल आखिर किसने जारी की?
रजिस्ट्री प्रक्रिया में दस्तावेजों का परीक्षण किस स्तर पर हुआ?
शिकायत मिलने के बाद भी जांच क्यों नहीं हुई?
क्या जिम्मेदार अधिकारी मामले की सच्चाई सामने आने से बच रहे हैं?
बेमेतरा में अवैध प्रॉपर्टी कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?
यदि शिकायतों, दस्तावेजों और तथ्यों के बावजूद जांच शुरू नहीं होती, तो आम नागरिक न्याय और पारदर्शिता की उम्मीद आखिर किससे करे?
बाजारपारा का यह मामला अब केवल एक जमीन की रजिस्ट्री का नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और अवैध प्रॉपर्टी कारोबार पर नियंत्रण की वास्तविक स्थिति को सामने लाने वाला मुद्दा बनता जा रहा है। जनता अब जवाब चाहती है—आखिर जांच कब होगी और अवैध भूमि कारोबार पर अंकुश कब लगेगा?





