बिना नंबर प्लेट सड़क पर दौड़ रही 108, परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

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त्तीसगढ़ बेमेतरा / नवागढ़ – विधानसभा क्षेत्र में संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा को लोगों के लिए “संजीवनी” माना जाता है। सड़क दुर्घटना, गंभीर बीमारी और आपातकालीन परिस्थितियों में यही सेवा लोगों की जिंदगी बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती है। लेकिन अब इसी 108 सेवा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।

क्षेत्र में संचालित एक 108 एम्बुलेंस बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बिना नंबर प्लेट के कोई वाहन सार्वजनिक सड़क पर कैसे संचालित हो रहा है? क्या वाहन का विधिवत पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) हुआ है? यदि हुआ है तो नंबर प्लेट क्यों नहीं लगी? और यदि रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है तो उसे फील्ड में उतारने की अनुमति किसने दी?

दुर्घटना होने पर जवाबदेह कौन होगा?

यदि इस एम्बुलेंस से कोई सड़क दुर्घटना हो जाए, किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचे या स्वयं वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए, तो उसकी पहचान कैसे होगी? शिकायत किस आधार पर दर्ज होगी? बिना नंबर प्लेट के वाहन की जवाबदेही तय करना आसान नहीं होता।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या परिवहन विभाग के नियमों में आपातकालीन सेवा के नाम पर बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने की छूट दी गई है? यदि नहीं, तो फिर यह वाहन किसके संरक्षण में सड़कों पर दौड़ रहा है?

परिवहन विभाग की नजर नहीं पड़ी या जानबूझकर अनदेखी?

आमतौर पर बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने पर आम नागरिकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाती है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग लगातार अभियान चलाने का दावा करते हैं। फिर एक सरकारी सेवा से जुड़ा वाहन उनकी नजरों से कैसे बच गया?

क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी इस वाहन के दस्तावेजों की जांच की? क्या फिटनेस, बीमा, पंजीयन और अन्य वैध दस्तावेज मौजूद हैं? या फिर नियमों का पालन सिर्फ आम जनता के लिए ही अनिवार्य है?

फायर ब्रिगेड वाहन का मामला भी बना था चर्चा का विषय

गौरतलब है कि नगर पंचायत नवागढ़ की एक फायर ब्रिगेड गाड़ी भी दुर्घटना के बाद दस्तावेजी खामियों को लेकर चर्चा में रही थी। ऐसे में अब 108 एम्बुलेंस का बिना नंबर प्लेट संचालित होना प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर रहा है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से जवाब जरूरी

क्या संबंधित 108 एम्बुलेंस का पंजीयन हुआ है?

यदि हुआ है तो नंबर प्लेट क्यों नहीं लगी?

बिना नंबर प्लेट वाहन को संचालन की अनुमति किसने दी?

क्या परिवहन विभाग ने इसकी जांच की है?

क्या स्वास्थ्य विभाग को इस स्थिति की जानकारी है?

यदि कल कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो जवाबदेही किसकी तय होगी?

जनता जानना चाहती है…

जीवन बचाने वाली सेवा यदि स्वयं नियमों के घेरे में खड़ी नजर आए तो सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर यह सवाल भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

फिलहाल एक तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है—आखिर बिना नंबर प्लेट दौड़ रही 108 एम्बुलेंस के पीछे की सच्चाई क्या है?

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