*सांपों की जान बचाते-बचाते चली गई स्नेक कैचर मनीष पाटिल की जान!**सांपों की जान बचाते-बचाते चली गई स्नेक कैचर मनीष पाटिल की जान!*
*एक छोटी सी चूक बनी आखिरी गलती रेस्क्यू के बाद डिब्बे का ढक्कन लगाते समय सांप के डसने से बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान मौत; नवागढ़ में शोक की लहर*
बेमेतरा/नवागढ़ – कई बार दूसरों की जान बचाने वाला इंसान अपनी ही जिंदगी की बाजी हार जाता है। बेमेतरा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम मुरता से सामने आई यह घटना भी कुछ ऐसी ही दर्दनाक कहानी बयां कर रही है।नवागढ़ थाने से करीब पांच किलोमीटर दूर मुरता गांव में सांप निकलने की सूचना पर 112 टीम के साथ स्नेक कैचर मनीष पाटिल मौके पर पहुंचे थे। मनीष लंबे समय से सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर लोगों को भय और खतरे से बाहर निकालने का काम करते आ रहे थे।बताया जा रहा है कि रेस्क्यू के दौरान सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़कर डिब्बे में रखा गया। इसके बाद जब मनीष डिब्बे का ढक्कन बंद कर रहे थे, तभी एक छोटी सी चूक ने पूरी स्थिति बदल दी और सांप ने उन्हें डस लिया।सांप के डसने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मनीष को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवागढ़ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें तत्काल सिम्स रेफर किया गया, लेकिन जिंदगी बचाने की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान मनीष पाटिल ने दम तोड़ दिया।
*सैकड़ों सांपों को सुरक्षित बचाया था*
मनीष पाटिल सिर्फ सांप पकड़ने वाले व्यक्ति नहीं थे, बल्कि कई लोगों के लिए उस वक्त मददगार बनकर पहुंचते थे, जब घर, खेत या आसपास सांप दिखाई देने पर लोग दहशत में आ जाते थे।बताया जा रहा है कि मनीष ने अब तक सैकड़ों सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया था। जिन सांपों को लोग डर की वजह से मार देना चाहते थे, उन्हें मनीष सुरक्षित पकड़कर उनके प्राकृतिक रहवास तक पहुंचाने का प्रयास करते थे।
लेकिन विडंबना देखिए—दूसरों के घरों से खतरा निकालने वाला यही शख्स एक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान खुद जिंदगी की जंग हार गया।मनीष की मौत की खबर फैलते ही नवागढ़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार, परिचितों और उन लोगों में भी गहरा दुख है, जिनके लिए मनीष मुश्किल वक्त में मदद का भरोसा हुआ करते थे।
*एक घटना, लेकिन कई सवाल भी*
यह हादसा सांपों के रेस्क्यू जैसे जोखिम भरे काम में प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और विशेषज्ञ निगरानी की जरूरत को भी सामने लाता है।क्या ऐसे रेस्क्यू के दौरान स्नेक कैचर के पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होते हैं?क्या हर रेस्क्यू टीम के साथ प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता और एंटी-वेनम की तत्काल व्यवस्था होती है?और सबसे अहम—जो लोग अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों और वन्यजीवों दोनों की जिंदगी बचाने का काम करते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?मनीष पाटिल अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सैकड़ों सांपों को बचाने और लोगों को सुरक्षित रखने की उनकी कोशिशें उनकी याद हमेशा जिंदा रखेंगी।









