*स्कुल मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च ‘फिर भी डंगनिया स्कूल बदहाल क्यों?*

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*स्कुल मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च ‘फिर भी डंगनिया स्कूल बदहाल क्यों?*

*एक कमरे और एक बरामदे में पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई बेहतर शिक्षा और अच्छे भवन के दावों की खुली पोल, जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रहा डंगनिया*

बेमेतरा/नवागढ़ – छत्तीसगढ़ में बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित स्कूल भवन और मूलभूत सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के जरिए स्कूल भवनों के कायाकल्प पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात कही जाती है। लेकिन बेमेतरा जिले के नवागढ़ विकासखंड के संकुल केंद्र मल्दा अंतर्गत शासकीय प्राथमिक पाठशाला डंगनिया की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।यहां एक कमरे और एक बरामदे में कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। सोचिए, एक ही स्कूल में अलग-अलग कक्षाओं के मासूम बच्चे और शिक्षक, सीमित जगह में पढ़ाई कैसे करते होंगे? बच्चों का ध्यान, शिक्षक का अध्यापन और पढ़ाई का माहौल इन सब पर इसका क्या असर पड़ रहा होगा?

एक तरफ सरकार बेहतर भवन, बेहतर शिक्षा और बच्चों के सुरक्षित भविष्य की बात करती है, तो दूसरी तरफ डंगनिया के बच्चे आज भी पर्याप्त कक्षा-कक्ष के इंतजार में हैं।

स्कूल के जर्जर भवन और बदहाल शौचालय की स्थिति भी गंभीर चिंता का विषय है। आखिर जिन बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजा जा रहा है, उनके लिए सुरक्षित भवन और साफ-सुथरा शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?

*जिम्मेदारों से अब सीधे सवाल*

*मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के नाम पर अगर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं, तो डंगनिया के स्कूल तक उस जतन का असर क्यों नहीं पहुंचा?*

*क्या स्कूल भवनों के कायाकल्प के दावे सिर्फ कागजों और सरकारी रिपोर्टों तक सीमित हैं?*

क्या जिला शिक्षा अधिकारी और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों ने कभी मौके पर पहुंचकर देखा कि बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं?वर्तमान शिक्षा सत्र में बच्चों को बेहतर भवन और बेहतर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं, तो डंगनिया में यह दावा कहां दिखाई दे रहा है?क्या एक कमरे और एक बरामदे में पांच कक्षाओं का संचालन ही बेहतर शिक्षा की सरकारी परिभाषा है?अगर स्कूल की समस्या की जानकारी पहले से जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई गई है, तो समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?और सबसे गंभीर सवाल अगर स्कूल की जर्जर स्थिति के बीच किसी बच्चे के साथ दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?क्या प्रशासन हादसा होने का इंतजार कर रहा है, या हादसे से पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?

*भ्रष्टाचार और लापरवाही की जांच की मांग*

मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना में स्कूल भवनों के लिए स्वीकृत और खर्च की गई राशि को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। डंगनिया स्कूल के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी खर्च हुई, किस एजेंसी या जिम्मेदार संस्था ने काम कराया और काम की गुणवत्ता की जांच किसने की क्या विभाग इसका सार्वजनिक जवाब देगा?अगर राशि खर्च हुई है, तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों नजर नहीं आ रहा? और अगर राशि का उपयोग नहीं हुआ है, तो फिर जिम्मेदार कौन है?यह सिर्फ एक भवन की समस्या नहीं है। यह उन मासूम बच्चों की पीड़ा है, जो बेहतर भविष्य का सपना लेकर रोज स्कूल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त कक्ष-कक्ष, सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी इस तस्वीर को देखकर भी चुप्पी साधे रहते हैं या जिम्मेदारी तय करते हुए तत्काल सुधार की पहल करते हैं।क्योंकि सवाल सिर्फ स्कूल भवन का नहीं सवाल डंगनिया के बच्चों के भविष्य का है।

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