मरवाही आदिवासी बालक छात्रावास में बदहाली की हदें पार…शौचालय मे पसरा गंदगी छात्रावास भवन टूट कर गिर रहा…और जिम्मेदार बेखबर…
न्यूज़ स्टोरी@गौरेला छत्तीसगढ़ :- छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ शौचालय और सम्मानजनक जीवन देने के दावे करती है। लेकिन जिला गौरेला–पेंड्रा–मरवाही के मरवाही पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास की तस्वीरें इन दावों को झूठा साबित कर रही हैं। यहां पढ़ाई कर रहे आदिवासी छात्र आज भी टूटती छतों, गंदे शौचालयों और जान के खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
यह दृश्य किसी जर्जर खंडहर का नहीं, बल्कि मरवाही पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास का है, जहां जिले के सुदूर अंचलों से आए आदिवासी छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर रहते हैं। छात्रावास का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि छत के बड़े-बड़े टुकड़े गिर चुके हैं और कई कमरों में कभी भी छत भरभराकर गिरने का खतरा बना हुआ है।
बारिश के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। छतों से लगातार पानी टपकता है, जिससे कमरे दलदल में तब्दील हो जाते हैं। छात्रों की किताबें, बिस्तर और कपड़े भीग जाते हैं और पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद छात्रों को इसी भवन में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
स्वच्छता की स्थिति तो और भी शर्मनाक है। छात्रावास के शौचालय पूरी तरह बदहाल हो चुके हैं। शौचालयों के दरवाजे टूटकर बिखर गए हैं, कई जगहों पर दरवाजे मौजूद ही नहीं हैं। चारों ओर फैली गंदगी और असहनीय दुर्गंध से छात्रों का शौचालय जाना तक दूभर हो गया है। यह हाल तब है जब सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराने की बात करती है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी रोष है। उनका कहना है कि आदिवासी बच्चों के जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि समय रहते भवन की मरम्मत और शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या जिला प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग इस गंभीर लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेंगे? या फिर मरवाही का यह छात्रावास किसी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद खोलेगा?









