*हालात ए बेमेतरा जिले के पत्रकार और अधिकारी कर्मचारियों की दिल चस्प होली*
होली के रंग फिकी और शराब की नशा ना उतार दे यह वाक्या कैसे और क्यों तो बगैर देरी किए पड़े विस्तार से…जहां ना पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि व पत्रकार यह वास्तविक हकिकत को वहीं समझ सकता है जिनकी लेखनी में दब हो जो रेत से पानी निकाल दें…और शरीफी के दामन ओढ़कर बेईमानी करने का खिताब जीत लिया हो…जिनके कथनी और करनी आसमान फर्क हो ऐसे बेईमान जो जिम्मेदार के पद पर बैठकर गैरजिम्मेदाराना हरकत करते हैं ऐसे बेईमान के लिए क्या लिखूं ..?
जो पत्रकार को चोरी दामन का साथ कहने वाले व झुठी प्रशंसा कर बेवकुफ बनाने वाले जिले के जिम्मेदारों की पोल और पत्रकारों के प्रति घृणित मानसिकता को दर्शाता है। जिनकी नियत में छल,कपट, बेईमानी,जाती वादी की कुंठित मानसिकता रखने वाले की यही हकीकत है जिसे वे बर्दास्त नहीं कर सकते हैं। मेरा मामना है की
ऐ देश के चौथा स्तंभ नहीं हो सकता… जो अधिकारियों के बंद लिफाफे पाने के लिए दरबारी की तरह जी हुजूरी करते हैं… और अधिकारी कर्मचारी भी उन पत्रकारों की इस हरकत से जमकर उनकी बेबसी का फायदा उठाते हैं… यदि यही पत्रकार अपनी लेखनी का सही तरीके से उपयोग करें तो जनता का सेवक कितने गफलत कर आलिसान बंगले और लाखों के बैंक बैलेंस करने वाले की काली कमाई सब उजागर हो सकता है सिर्फ एक वर्ष…नो प्रेसवार्ता…एक वर्ष सिर्फ जिले में कार्यरत अधिकारियों कर्मचारियों और ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों की हकीकत को आम जनता के बीच जाकर सामने लाए …. और दिखाएं की किस तरह जनता का सेवा करने के लिए बिठाए गए जिम्मेदार की औधी मानसिकता जो गरीबों को लुटने और शोषण करने तथा न्याय देने में कितने बेबस और लाचार हो जाते हैं। वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों की डांट दपट खाकर काम गलत तरीके से काम करने में लग जाते हैं। जिसे आम जनता की गुहार से अच्छा जनप्रतिनिधियों की डांट फटकार पसंद है। आईए एक जिम्मेदार की हकीकत से पर्दा उठाते हैं और खबर विस्तार से बतलाते हैं। प्राप्त सूत्रों से पता चला है की आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों ने तो सारी रिकार्ड ही तोड दी प्लेसमेंट एजेंसी के जिम्मेदार का चलने ही नहीं दे रहा है। और जिम्मेदार अफसर अपनी मनमर्जी में मस्त हैं और कार्यरत सेल्स वर्कर, मैनेजर ,सुपरवाइजरो को जब मर्जी तक निकालकर बाहर कर देते हैं और फिर सौदा कर फिर से रख लेना इस तरह की खेल सरे आम चल रहा है। चुप्पी जिस दिन टुटेगी उसी दिन सारी पोल खुलेगी। किस तरह शराब दुकानों पर कार्यरत लड़कों को दबाव बनाया जाता है। साथ ही अवैध शराब की बिक्री करने वाले लोगों से महिना वशुली का खेल चल रहा है किसी से छुपा नहीं। सिर्फ उजागर होने से बचा है।
*हालात ए बेमेतरा जिले के पत्रकार और
अधिकारी कर्मचारियों की दिल चस्प होली*
जिनकी जिम्मेदारी ही है अवैध शराब की बिक्री रोके वे ही जिम्मेदार खुले आम पत्रकारों को फोन कर तो कुछ को जाकर एक ब्रांडेड तो कुछ देशी बाटला थमा रहे हैं। अब एक प्रश्न है जो सबके मन में उत्पन्न हो रहा है। की आखिर इतनी शराब आया कहां से आबकारी विभाग से खरीदी किया या दबाव बनाकर लाया गया । यदि दबाव बनाकर लाया तो आबकारी अधिकारी जवाद दे की डर की बात का सम्मान में थाना प्रभारियों को दिया है तो उनकी भरपाई किसने किया। और यदि आबकारी विभाग के जिम्मेदार गलती कर रहे हैं तो उस पर थाना चौकी प्रभारी पर्दा क्यों डाल रहे हैं। क्यों कार्यवाही नहीं कर रहे यह भी एक बड़ा सवाल है…?
आखिर कब तक चलेगा पत्रकारों के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ और कब तक थाने चौकी प्रभारीयों से एक शराब की बोतल और कुछ अधिकारीयों की पत्रकारों के साथ अमानवीय व्यवहार जो बंद लिफाफे में पत्रकारों के स्वाभिमान का सौदा समझते हैं। जो अपने आप को सबका मुखिया बतलाकर कुछ अपने आपको उससे बेहतर ऐसा कहके एक दूसरे की सिर पर पैर रखकर श्रेष्ठ बतलाने वाले की हकीकत सब को पता है और सब समझ चूके है…इतनी सस्ती नहीं होनी चाहिए पत्रकारों की लेखनी जो एक कप चाय और एक समोसे तक सीमित हो जाए…अपनी वाहवाही की खबर छपवाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी पत्रकारों को पत्रकारवार्ता कर लेते हैं सिर्फ एक समोसे और एक कप चाय में और जब पत्रकारों का सम्मान की बात हो तो थाने में एक बोतल शराब और चेहरा पहचान कर आव भगत करने वाले की हकीकत उजागर होते ही लिपापोती का खेल अब नहीं होगा बल्कि चेहरा और उनके कारनामे की पर्दा उठाकर आम जनता के बीच अवश्य लाया जाएगा। बहरहाल शांति से मनाए होली फिर खबरें विस्तार से अधिक जानकारी के लिए लगातार देखते रहिए सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट की लेखनी से एक पहल…
*ईंट भट्ठे के मजदूर समझ कर पत्रकारों को थमा रहे शराब*
जिस तरह ईंट भट्ठे पर कार्यरत मजदूरों को होली व अन्य त्योहारों में शराब की बोतल और एक मुर्गा देकर सहयोग देने वाले ईंट भट्ठे के मालिक व थाना चौकी प्रभारियों में क्या अंतर है जो एक मजदूर और एक पत्रकार की तुलना एक बाटला शराब से करते हैं। ऐ तो वहीं बात हो गया की अपराध की ओर आगे बढ़ो या मंद पीकर पड़े रहो यही हकिकत है।
अवैध शराब की बिक्री पर बढ़ावा और जिम्मेदार इंस्पेक्टरों की अवैध कमाई का बना जरीया जो खुलकर शराब बेच रहे हैं उनका कुछ नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वही से मलाई मिठाई बंधा हुआ है। और कुछ परिवारीक काम व उत्सव में लाते मिल गया उनको अपराधी बनाकर दिखावे की कार्यवाही करने वाले जिम्मेदार लोग आम जनता को अपराधी बना रहा है।
जिनके मन में पत्रकारों के प्रति गंदी मानसिकता का रंग भरा हो वह आम जनता के साथ कैसे करता होगा यह बड़ी चिंता का विषय है। अवैध गतिविधियों में रोक लगाने के लाख दावे करने वाले जिम्मेदारों की हकिकत यही है जो शराब देकर शराबी बनाने का ठेका उठा रखे हैं। बेमेतरा जिले के पुलिस,यातायात,आबकारी, सबसे बड़ा सवालों के घेरे नजर आ रहे हैं जिनको अपनी लेखनी से आम जनता व राज्य सरकार के समक्ष पेश कर रहा हूं। क्या यही है उत्सव मनाया का तरीका क्या ऐसा जिम्मेदार पत्रकारों को शराब देकर सम्मानित किया जाता है। और वाह रे पत्रकार जो एक बोतल शराब में डूबकर पत्रकार होने स्वाभिमान को धुमिल कर दिया । जरा शर्म करो तुम्हारी निष्पक्ष और निर्भीक लेखनी से बेमेतरा जिले की जनता बेमेतरा जिले में शांति और अमन,अन्याय व भय मुक्त जीवन की कामना कर रहे हैं। उनके विश्वास को एक बोतल शराब से तौल दी।










