*राजस्व विभाग में हल्का पटवारी की हकीकत उजागर…जिला मुख्यालय का मामला कार्यवाही की मांग… कलेक्टर ने दिया कार्यवाही आश्वासन मगर … कार्यवाही करने में किसका सता रहा डर…उत्सव सलूजा*
*दोषियों को राजनीति सरक्षण मिलने के कारण बढ़ रहे हौसले*
न्यूज़ स्टोरी @ बेमेतरा छत्तीसगढ़ की
एक ऐसी हकीकत सामने आया जो राजस्व विभाग की पूरी पोल खोलकर रख दी जी हां पूरा मामला छत्तीसगढ़ राज्य के बेमेतरा जिले के राजस्व हल्का पटवारी की चेहरे को बेनकाब कर दिए … शिकायतकर्ता ने राजस्व विभाग के हल्का पटवारी को बिक्री नकल पर रोक लगने का लिखित पत्र देने के बावजूद अवैधानिक तरीके से नकल देकर बेशकिमती जमीन का रजिस्ट्री करवा देने का मामले उजागर हुआ है जो एक जिम्मेदार की जिम्मेदारी पर सवाल खडे कर दिए है। शिकायत कर्ता ने जिला कलेक्टर बेमेतरा व अनुविभागिय दण्डाधिकारी को लिखित शिकायत कर जांच उपरांत उचित कार्यवाही की मांग की … मगर बेमेतरा जिले में न्याय की गुहार लगाना क्या ठीक है। क्योंकि दोषियों के कारनामे की 1 सौ 12 पेज का साक्ष्य दस्तावेज देने व कलेक्टर द्वारा त्वरित कार्यवाही का आश्वासन करवाने की बात का दिलासा शिकायकर्ता को दिया था किंतु कार्यवाही नहीं करना एक संदेह और राजनीतिक संरक्षण दोषियों को मिलने का अंदेशा स्पष्ट कर रहा है। बेमेतरा जिला मुख्यालय पर कलेक्टर जनदर्शन कर शहर से लेकर गाँव के फरियादियों की फरयाद को सुनकर न्याय का आश्वासन व न्याय दिलाए भी है। मगर बडी दुर्भाग्य का विषय है। जहा एक फरियाद अपनी फरियाद को लिखित में देने व आश्वासन मिलने के बावजूद भी 6 माह निकाल दिए किन्तु वादे और आश्वासन का कोई प्रतिक्रिया देखने व सुनने का नही मिला क्या ❓ बंद लिफाफे व राजनीतिक संरक्षण के वजह से जिम्मेदार की कलम फरियादी को न्याय देने से बचना चाह रही है..? क्या अपनी स्वाभिमान की सौदा तो नही कर दिए जिम्मेदार..? आखिर कौन बचा रहा दोषियों को… परदे के पीछे कौन न्याय प्रणाली को चैलेंज कर रहा है..? जल्द देखिए गा सरकारी नुमाइंदों की हकीकत और सरीफ का दामन का चोला ओढ़कर किस तरह आम नागरिकों को राजनीतिक संरक्षण के बल पाकर गैर जिम्मेदाराना हरकत और मनमानी का राज कर रहे हैं। बहरहाल खबर का शेष अगले अंक में…एक ही हल्का पटवारी जो राम भूमि मामले में काफी सुर्खियों में था उसका एक और मामले पर कौन डाल रहा पर्दा या किस राजनीतिक का खुला संरक्षण मिल रहा इस लिए सवाल तो बनता है और जिम्मेदारों से सवाल भी पुछेगें… उससे पहले आईए सुनते है फरियाद लगाने वाले की जुबान से…
बाईट 1- उत्सव सलूजा पीड़ित










