*गुरु के ज्ञान से संवरता है भविष्य, शीतला पारा स्कूल में शिक्षकों को किया नमन*

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*गुरु के ज्ञान से संवरता है भविष्य, शीतला पारा स्कूल में शिक्षकों को किया नमन*

*शिक्षक दिवस पर विशेष आयोजन, डॉ. राधाकृष्णन के आदर्शों को किया याद; बच्चों ने जाना गुरु के मार्गदर्शन का महत्व*

शीतला पारा – मां शीतला की पावन धरा में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला एवं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला शीतला पारा में शिक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त तत्वावधान में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए शिक्षक दिवस मनाया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनिल कुमार मौर्य ‘अनल’ रहे, जिन्होंने पूर्व में इसी संस्था में अतिथि शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था प्रमुख आत्माराम कोरार्म ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन और शिक्षा के प्रति समर्पण को याद करते हुए विद्यार्थियों को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।मुख्य अतिथि अनिल कुमार मौर्य ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि 5 सितंबर को डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिवस के रूप में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वे एक आदर्श शिक्षक और महान शिक्षाविद थे। उनके आदर्शों को अपनाकर विद्यार्थी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं, बल्कि एक अच्छे इंसान भी बन सकते हैं।कार्यक्रम की अगली कड़ी में कल्पना ठाकुर ने विद्यार्थियों को अनुशासन के साथ अध्ययन करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए, ताकि वे अपने माता-पिता के सपनों को साकार करने में सफल हो सकें।

*‘गुरु को नमन’ कविता ने बांधा समां*

मुख्य अतिथि अनिल कुमार मौर्य ने अपनी स्वरचित कविता ‘गुरु को नमन’ प्रस्तुत करते हुए गुरु-शिष्य के रिश्ते की महत्ता को भावपूर्ण ढंग से सामने रखा—

*“हे गुरु! आपने मुझे जमीं से उठाकर,आसमां की बुलंदी तक पहुंचाया।”*

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष गुण अवश्य होता है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि शिक्षक अपने ज्ञान चक्षु से उस प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा दें।उन्होंने बच्चों की तुलना कच्ची मिट्टी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार कच्ची मिट्टी को आकार देकर एक सुंदर घड़ा बनाया जाता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान और संस्कारों से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं।उन्होंने शिक्षक की भूमिका को टकसाल से भी जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार टकसाल में सिक्के और नोट तैयार होते हैं और उन पर एक विशेष पहचान अंकित होती है, उसी प्रकार विद्यालय रूपी टकसाल में शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और अनुशासन से गढ़कर समाज के लिए योग्य नागरिक बनाते हैं।

कार्यक्रम में गुरु की महिमा को व्यक्त करते हुए यह पंक्तियां भी प्रस्तुत की गईं—

*“गुरु आइसन चाहिए ज्यों मजिट के रंग,धोए से धुले नहीं, जाए प्रान के संग।”*

वक्ताओं ने कहा कि गुरु उस मोमबत्ती के समान होता है, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में ज्ञान और प्रकाश फैलाता है।कार्यक्रम का संचालन मेहबूब खान ने किया। इस अवसर पर स्कूल समन्वयक प्रशांत मेश्राम, लतीफ खान, रूपा जैन, कुमारी शीतल यादव, गौसिया बानो, जानवी सारथी, दिशा रजक, केतन सारथी, ताहिर खान सहित विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।शिक्षक दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प का अवसर बन गया।

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