बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की पड़ोसी कूटनीति पर राष्ट्रीय मंथन
आईएसबीएम विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, विशेषज्ञों ने कहा—मजबूत पड़ोसी संबंध ही भारत की वैश्विक ताकत की आधारशिला
छुरा/गरियाबंद, 18 अगस्त 2026। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत के पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों, क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग की नई संभावनाओं को लेकर आईएसबीएम विश्वविद्यालय, छुरा में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) के सहयोग एवं कला एवं मानविकी विभाग के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में देशभर से शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय “बदलते वैश्विक दौर में भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की नई सोच” रहा। वक्ताओं ने भारत की विदेश नीति, ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति, दक्षिण एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन, आर्थिक एवं सांस्कृतिक कूटनीति, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया।
विश्वविद्यालय की संयुक्त कुलसचिव डॉ. रानी झा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे सम्मेलन युवा शोधकर्ताओं को विशेषज्ञों से संवाद करने, अपने शोध को प्रस्तुत करने और नए विचारों को समझने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने युवाओं से चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
अकादमिक अधिष्ठाता एवं IQAC निदेशक प्रो. (डॉ.) एन. कुमार स्वामी ने कहा कि सम्मेलन भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और दक्षिण एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है। कुलसचिव प्रो. (डॉ.) बी.पी. भोल ने कहा कि अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन संघर्ष, हिंद-प्रशांत क्षेत्र का बढ़ता महत्व और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बदलाव का असर भारत के पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास की अहम रणनीति बन गई है।
कुलपति प्रो. (डॉ.) आनंद महलवार ने कहा कि मजबूत पड़ोसी संबंध भारत को प्रभावशाली और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वहीं भारतीय वैश्विक परिषद की प्रतिनिधि डॉ. अन्वेषा घोष ने कहा कि भारत की ताकत केवल आर्थिक और सैन्य क्षमता से नहीं, बल्कि पड़ोस में स्थिरता, विश्वास और सहयोग का वातावरण बनाने की क्षमता से भी तय होगी। उन्होंने भारत की पड़ोसी कूटनीति को “सुरक्षा से सहयोग और सहयोग से साझा विकास” की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
हिंद-प्रशांत से AI और जलवायु परिवर्तन तक हुई चर्चा
सम्मेलन के दौरान डॉ. सीमा मल्लिक ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती भू-राजनीति और भारत की भूमिका पर विचार रखे। प्रो. आई.डी. तिवारी ने भारत के पड़ोसी संबंधों को भाषा, साहित्य, संस्कृति, पहचान और साझा इतिहास के नजरिए से समझने पर जोर दिया। डॉ. प्रमोद कुमार ने मध्य एशिया में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और उसकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
दूसरे दिन विदेश नीति के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, पर्यावरणीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और मानव सुरक्षा जैसे समकालीन विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के संबंधों को एक विकसित होती यात्रा बताया। डॉ. अमन झा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की।
डॉ. राणा नवनीत रॉय ने जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय समस्या न मानकर मानव सुरक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य, खाद्य एवं जल सुरक्षा, प्रवासन और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा व्यापक मुद्दा बताया।










