एशिया के सबसे बडी कहे जानें वाली मरीन फाॅसिल्स पार्क… 
न्यूज़ स्टोरी@ एमसीबी कोरिया छत्तीसगढ़- एशिया के सबसे बडी कहे जानें वाली मरीन फाॅसिल्स पार्क आज किसी भी पहचान का मोहताज नही है। छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन एवं वन विभाग के सतत संरक्षण एवं प्रयासों के परिणाम स्वरूप मनेन्द्रगढ़ स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क आज शैक्षणिक, शोध एवं वैज्ञानिक पर्यटन के क्षेत्र में विशेष पहचान स्थापित कर रहा है। – एमसीबी जिला मुख्यालय मनेंन्द्रगढ़ के आमाखेरवा हसदेव नदी तट पर स्थित 29 करोड वर्ष पुराना समुद्री जिवाश्म मिलनें के बाद इसे संग्रहीत एवं रख-रखाव का दायित्व वन विभाग नें संभाला, और जिले के वनमण्डलाधिकारी मनीष कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग द्वारा इस भूगर्भीय धरोहर के संरक्षण, सुरक्षा एवं सुव्यवस्थित विकास हेतु उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। पार्क क्षेत्र में संरक्षित सीमांकन, सूचना प्रदर्शक बोर्ड, नियंत्रित भ्रमण व्यवस्था तथा पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रबंधन कार्य सुनिश्चित किए गए हैं। वहीं इस पार्क को पुर्णरूप विकसित करनें के बाद अप्रैल 2025 में प्रदेश के स्वास्थ्यमंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के हांथो उदधाटन कर आम जनता के लिए पार्क को समर्पित कर दिया गया था। और आज इसका परिणाम यह है कि यह स्थल शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पर्यटकों के लिए सुरक्षित और ज्ञानवर्धक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। और यही वजह है कि उदधाटन के बाद यहां अब तक 18 हजार पर्यटक पहुंच कर गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क में उपलब्ध दुर्लभ समुद्री जीवाश्मों एवं भूगर्भीय संरचनाओं का अवलोकन कर चुके हैं। इसी क्रम में डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (मध्यप्रदेश) के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग की एक शैक्षणिक टीम ने पार्क का अध्ययन एवं भ्रमण करनें पहुंचा था। इस दौरान विद्यार्थियों के साथ विभाग के प्रोफेसर डॉ. के.के. प्रजापति एवं डॉ. एस. सेल्व कुमार ने भी पार्क में उपलब्ध दुर्लभ समुद्री जीवाश्मों एवं भूगर्भीय संरचनाओं का अवलोकन किया। अध्ययन भ्रमण के दौरान एमसीबी जिले के पुरातत्व विभाग एवं पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय द्वारा उपस्थित छात्रों एवं शिक्षकों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क के संरक्षण, विकास एवं भावी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
बाईट-1- डाॅ. बिनोद पांडेय, पुरातत्व एवं पर्यटन नोडल अधिकारी, मनेन्द्रगढ़
भ्रमण के दौरान स्थानीय स्तर पर भूगर्भ विज्ञान के प्रति जागरूक नागरिकों द्वारा भी छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वन विभाग की इस पहल को जब स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त होता है, तो संरक्षण प्रयास और अधिक प्रभावी बनते हैं। और आज प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की शैक्षणिक टीम का यह भ्रमण इस बात का प्रमाण है कि वन विभाग द्वारा किए गए संरक्षण एवं विकास कार्यों से गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क राष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। वन विभाग भविष्य में भी इस महत्वपूर्ण भूगर्भीय धरोहर के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर प्रयासरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रह सके। इस अवसर पर मनेंद्रगढ़ जिले के वनमण्डलाधिकारी मनीष कश्यप ने टीएनपी संवाददाता से बात करते हुये बताया कि मनेन्द्रगढ़ का मरीन गोंडवाना फॉसिल पार्क छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूगर्भीय धरोहर है। वन विभाग का निरंतर प्रयास रहा है कि इस दुर्लभ विरासत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संरक्षित करते हुए शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पर्यटकों के लिए सुरक्षित और सुलभ बनाया जाए। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान का यहां अध्ययन भ्रमण यह प्रमाणित करता है कि हमारे संरक्षण प्रयास सही दिशा में हैं। उद्घाटन के बाद से अब तक यहाँ 18 हज़ार टूरिस्ट पहुँच चुके है। इसमें अब-तक छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, के आलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी तादाद में टूरिस्ट्स यहां पहुंच चुके है।
मनीष कश्यप, वनमण्डलाधिकारी, मनेन्द्रगढ़,










